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मेरे अल्फाज़

मैं हिन्दी माँ की बेटी

गीता पंडित

2 कविताएं

29 Views
मैं हिंदी माँ की बेटी

मैं हिंदी माँ की बेटी सुन
सौ करोड़ गाने वाले हैं
सोच रही मैं अब बस ये ही
अच्छे दिन आने
वाले हैं

विश्व पटल पर खडी हुई मैं
देख स्वयं को हुलसाती
हाँ अपने घर के झगड़ों से
मन ही मन तो दुःख पाती

फिर भी है विश्वास चुभे जो
पिन सारे जाने
वाले हैं
अच्छे दिन आने
वाले हैं

यही समय की मांग कि अब हम
भाषाएँ सारी सीखें
लेकिन मैं तो अपनी हूँ बस
संग मेरे सारे दीखें

पहन मेरा बासंती चोला
सब जग में छाने
वाले हैं
अच्छे दिन आने
वाले हैं

ड्योढ़ी-ड्योढ़ी जाकर अब तो
मेरा अलख जगाना है
मेरे देश के वीर सपूतो
मुझको अब अपनाना है

सत्ता के गलियारे भी तो
अब मुझको गाने
वाले हैं
अच्छे दिन आने
वाले हैं

- गीता पंडित (दिल्ली)
सम्पादक 'शलभ प्रकाशन'


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