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mai aur meri bhoomika

मेरे अल्फाज़

आईआईटी दिल्ली से हमारे पाठक अर्जित बता रहे हैं, मैं और मेरी भूमिका

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भीड़ में शामिल होकर
हैवान बन जाता हूँ मैं
बंद कमरे में अक्सर
इंसान बन जाता हूँ मैं 

निर्बल को चोट पहुँचा
बलवान बन जाता हूँ
भूखे को खाना खिला
धनवान बन जाता हूँ मैं

घृणा के टीले पर बैठ
शैतान बन जाता हूँ
प्रेम की खुशबू बिखेर
भगवान बन जाता हूँ

कटु शब्दों से आहत हो
शमशान बन जाता हूँ मैं
टूटे छप्परों को देख उनका
बागवान बन जाता हूँ मैं


- अर्जित पाण्डेय

एम टेक स्कॉलर, आई आई टी, दिल्ली

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