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Usane batavare kee baat kee

मेरे अल्फाज़

उसने बंटवारे की बात की

Mahesh Rautela

51 कविताएं

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उसने बंटवारे की बात की,
और सब अपना-अपना हिस्सा गिनने लगे।

सबने धरती को बाँटा,
आकाश पर किसी की नजर नहीं पड़ी।

मनुष्य इतना बँटा कि खून खराबा होने लगा,
कोई देश से खुश नहीं, कोई जाति-धर्म से खुश नहीं,
प्यार की बात करो तो कोई प्यार से खुश नहीं।

कोई पाँच गाँव लेने को तैयार है,
तो कोई सुई की नोंकभर देने को राजी नहीं।

लड़ाई-झगड़ों के लिए बहुत बड़ी दास्तान नहीं चाहिए,
बहुत बार मंदिर-मस्जिद या तस्वीर ही काफी है।

मनुष्य यदि जड़ हो जाय तो समस्या है,
पेड़ में जड़ है तो जीवन है।

किसको कितनी फिक्र है देश की,
इतिहास से सिद्ध हो जाता है।

- महेश रौतेला

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