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मेरे अल्फाज़

"मोहन दास करमचंद गांधी "

Mahendra Kumar

4 कविताएं

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मुक्त कराने आया गांधी,
बना अहिंसा की वह आंधी।
कलियुग का था ऋषि समान,
मोहन दास करमचंद गांधी।।
अभी उम्र कुछ बड़ी नहीं थी,
आनी थी कस्तूरबा गांधी।
पति पत्नी सम्बन्ध दिखाया,
भारत मां का लाल था गांधी।।
ऋषि युग्म बन घूम रहे थे,
दुनिया को अपनाते गांधी।
संकीर्णता का नाम नहीं था,
ऐसा रत्न महात्मा गांधी।।
सच्चे मन से न्याय धर्म से,
चरखा खूब चलाते गांधी।
शूद्र कर्म पर ऊंचा चिंतन,
कर्म प्रधान दिखाते गांधी।।
एक लंगोटी आधा नंगा,
ऐसा चला महात्मा गांधी।
मन का अपना राजा था वह,
राज घाट में बनी समाधी।।
करुणा उसमें जाग रही थी,
त्याग बना था महात्मा गांधी।
मानव मन पर हो अधिकार,
सत्य धर्म की चलती आंधी।।
दया प्रेम करुणा अवतार,
भारत मां का प्यारा गांधी।
मानवता में था विश्वास,
मोहन दास करमचंद गांधी।।
पोरबंदर में जनम लिया था,
यमुना तट पर बनी समाधी।
घाट बहुत गंगा के तट पर,
राज घाट पर बनी समाधी।।
सत्य सनातन धर्म धरा पर,
दिखा चुका है कितने गांधी।
युगों युगों से करते आये,
धरती मां की सेवा गांधी।।
सत्य सनातन धर्म चलेगा,
चले धर्म की ऐसी आंधी।
सत्य ज्ञान अभियान चले जब,
सत्कर्मों की चलती आंधी।।
हिंसा का अभियान रुकेगा,
रुके धर्म की ऐसी आंधी।
मानवता अभियान चलेगा,
तभी हंसेंगे सारे प्राणी।।
सभी देव नत मस्तक होते,
जब चलता है ऐसा प्राणी।
दुनिया का कल्याण कराने,
आ जाते हैं कृष्ण मुरारी।।
आंधी एक चलेगी ऐसी,
जैसे चले महात्मा गांधी।
पूर्ण सत्य तो सूर्य समान,
पूर्ण सत्य की चलती आंधी।।
मानवता पर फ़ूल चढ़ाओ,
मन्द पवन बन जायें आंधी।
राग द्वेष सब दूर भगा दो,
सुन्दर मन में सुन्दर आंधी।।
सत्य सनातन धर्म जगेगा,
जब जब आयेंगे ये गांधी।
मानवता बलिहारी होगी,
विश्व में आये ऐसी आंधी।।

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