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Why pretended and how much.

मेरे अल्फाज़

धोखा किसे, आखिर कब तक

Mahender Singh

218 कविताएं

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क्या समझे हो,...
मुझसे कुछ छिपा है,
दृष्टा बन ..सहज सतत ...
अपलक सजग होश हूं,
पल पल नजर रखता हूं,
क्षण क्षण की खबर हूं,

तू लाख कर आयोजन बचने के,
आखिर तेरे हर कर्म में बसता हूं,
तू मांगे या न मांगे तुझसे पहले देता हूं

कर्म से पहले अभिलाषा रखता है,
आखिर किस पर धोखे धरता है,
समझ आपसी क्यों नहीं समझता,
अहंकार वश मेरी रचना में बाधक बनता है,

-डॉ महेन्द्र सिंह खालेटिया

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