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Festival is life-style.

मेरे अल्फाज़

जीने का ढंग है उत्सव

Mahender Singh

187 कविताएं

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अब आप समझे,
उत्सव है, नृत्य है, कृत्य है,
कल्पना है, हकीकत है,
पर है जरूर,
जीने का ढ़ंग है,

गर आप गवाह हैं,
यही परिवर्तन है,
रूपांतरण है,
नहीं तो कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं...।।

- डॉ. महेंद्र

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