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मेरे अल्फाज़

अमन की तालीम

Mahendar Singh

15 कविताएं

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जिस दिन मंदिर में इबादत होगी
मस्जिद में होगी प्रार्थना ,
दीपावली मुस्लिम के गर होगी
हिंदू ईद मनायेगा
जब बारिश में मौलाना मस्जिद
तक नहीं जा पायेगा
मन्दिर में बैठकर नमाज़ पढ़ लेगा
पुजारी जी मस्जिद में पुजा कर लेंगे
हिंदू के घर मुस्लिम
मुस्लिम के घर हिन्दू बाराती बन आयेंगे
उसी दिन इस जहां में
खुदा और भगवान भी आ जायेंगे
फिर जन्नत भी यही
स्वर्ग भी यही मिल जायेगा।
अभी तक न मुस्लिम की नमाज़ कबूल हुई
न हिन्दू की प्रार्थनाएं
अभी तक तुम एक भी पाक साफ नहीं हुए
अगर तुम पाक साफ होते तो
क्या खुदा देर करता इतनी
तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार करने में
आने दो खुदा को
इस धरती पर ही
खुदा और भगवान को शांती पसंद है
एक बार मस्जिद और मंदिर को
मिला कर तो देखो
गीता और कुरान उठा कर तो देखो
क्या पैगाम लिखा है
यूं ही काफ़िर बनते जा रहे हो
अमन की तालीम का
संसार बना कर तो देखो
खुदा कैसे नहीं आते

महेंद्र राजपुरोहित



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