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मेरे अल्फाज़

बेपनाह मुहब्बत

madhur gupta

8 कविताएं

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मै करती हूँ बेपनाह मुहब्बत तुमसे,
तुम भी करो इतना ये जरूरी तो नही,
लफ्जों के मोती, स्नेह के धागों मे पिरोए रहना
सदा प्रेम की बरसात ही हो,ये जरूरी तो नही,

मैं लड़ती रहुंगी तुम्हारे लिए सबसे,
तुम भी लड़ो मेरे लिए, ये जरूरी तो नहीं,
सम्मान में मेरे दो चार लफ्ज ही काफी है,
सदा पक्ष में खड़े रहो, ये जरूरी तो नहीं,

मैं मुकम्मल होने की ख्वाहिश रखती हूँ तुम्हारे लिए,
तुम भी ऐसे ख्यालात रखो, ये जरूरी तो नहीं,
कभी कभार ही सही,कुछ दूर तलक साथ चलो मेरे,
हम कदम रहो सदा ये जरूरी तो नहीं,

मै करती हूँ बेपनाह मुहब्बत तुमसे,
तुम भी करो इतना ये जरूरी तो नहीं!

डा. मधुर गुप्ता, वाराणसी

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