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मेरे अल्फाज़

एहसास

Madan sen

17 कविताएं

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#एहसास

बहुत टूट के कुछ पाने का मज़ा और ही है।
तुझे अपना बनाने का मज़ा और ही है।

यूँ तो रूठों को मनाया है हमने कई कई दफा ।
लेकिन खुद से रूठ जाने का मज़ा और ही है।

तुझे खो के लग रहा था के खो गया हूँ खुद से भी।
खोये हुए खुद को फिर पाने का मज़ा और ही है।

वैध-हकीमो से जब न हुआ हाल-ऐ-दिल का ईलाज़।
तब जाना के दर्द-ऐ-दिल की दवा और ही है।

तेरी उस मुस्कान को इश्क़ समझ बैठा था दिल।
अब समझ आया के ये आबोहवा और ही है।

~Maddy

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