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Tumharee Mohnee surat to har pal aankh men rahtee

मेरे अल्फाज़

तुम्हारी मोहनी सूरत तो हर पल आँख में रहती

Madan Saxena

67 कविताएं

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तुम्हारी याद जब आती तो मिल जाती ख़ुशी हमको
तुमको पास पायेंगे तो मेरा हाल क्या होगा

तुमसे दूर रह करके तुम्हारी याद आती है
मेरे पास तुम होंगे तो यादों का फिर क्या होगा

तुम्हारी मोहनी सूरत तो हर पल आंख में रहती
दिल में जो बसी सूरत उस सूरत का फिर क्या होगा

अपनी हर ख़ुशी हमको अकेली ही लगा करती
तुम्हार साथ जब होगा नजारा ही नया होगा

दिल में जो बसी सूरत सजायेंगे उसे हम यूं
तुमने उस तरीके से संभाला भी नहीं होगा

तुम्हारी मोहनी सूरत तो हर पल आँख में रहती

- मदन मोहन सक्सेना

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