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मेरे अल्फाज़

सीया स्वयंवर

Loveneet Mishra

77 कविताएं

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धनुष भंग कर राम ने,
रखा स्वयंवर मान,
जनकसुता जानकी हृदय,
बसे अवध गुणधाम,
मात सुनैना नयन बहे,
जनक हृदय घबराए,
परम कुलीना पुत्री को,
कैसे विदा कराए,
कहे जनक से गौतम मुनि,
रखो विदेह मन धीर,
सीया राम के मिलन पर,
ना करो हृदय गंभीर,
हे! देवी मिथिला रानी,
सीता करो श्रृंगार,
जनक राज अवध भेजो,
विवाह का शुभ समाचार,
दशरथ सुन पुत्र विवाह,
ले आए संग बारात,
रामचंद्र जी बन दुल्हा,
ले गए सीया को साथ।

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