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मेरे अल्फाज़

सूखे पत्ते

Leena Dariyal

41 कविताएं

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सूखे पत्तों की भी अपनी किस्मत है,
कभी किसी शाख की सजावट होते हैं।

हवा के साथ सिरमौर बन जाते हैं,
तो कभी पैरों के नीचे बिछावट होते हैं।

सरसराहट से कभी सांस लेते हैं,
कभी मृतप्राय मिट्टी की लगावट होते हैं।

कभी चरमराहट से जैसे चीखते हैं,
कभी कई आवाजों की बनावट होते हैं।

सूखे पत्ते भी जब जमीं में घुलते हैं,
किसी नई सृष्टि बनने की इमारत होते हैं।

कई राज ये अपने साथ छुपा लेते हैं,
किसी रोज एक मुकम्मल इबारत होते हैं।

- लीना

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