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मेरे अल्फाज़

लव की मां पर लिखी ये कविता पढ़कर आपको मां याद आएगी

Lav Gaur

6 कविताएं

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आज भी जब भी कभी किसी बात से में टूटता हूं। 
तेरा वो चमत्कारी पल्लू मां में ढ़ू्ढता हूं।।

जिसमें बचपन मेरे आंसू मां भर लेतीं थीं।
लगाकर सीने से सारी दुश्वारियां हर लेतीं थीं।।

मां को दुख ना हो इसलिए मैं अब नहीं रोता ।
उनकी अवस्था को सोचकर धीरज नहीं खोता ।।

मैं सोचता हूं आंसू पोंछने की अब मेरी बारी है।
पर मां की गम छिपाने की कला मुझ पर अब भी भारी है।। 
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