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मेरे अल्फाज़

मुक्तक संग्रह

Lalit Agaaj

1 कविता

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नफरतों में मुहब्बत लिखा था तुम्हें
नीर खुद और शरबत लिखा था तुम्हें
तुम जिसे पढ़ हँसी चार घण्टे तलक,
रोते रोते वही खत लिखा था तुम्हें

सात फेरे वचन सात भूलों न तुम
वो मिलन की प्रथम रात भूलों न तुम
भूल जाओ सभी कुछ मगर ऐ सनम,
पहली पहली मुलाकात भूलों न तुम

हो गलत जब कहीं बाधिका वो बनें
भूलकर मोह इक साधिका वो बनें
प्रेम की भूमि जब रास रचने लगें ,
मैं बनूँ कृष्ण तब राधिका वो बने

पेड़ इमली के अब बेर होने लगे
देख कर हम तुन्हे ढेर होने लगे
तुम गजल हो किसी की या मतला कोई ,
आप पर आज कल शेर होने लगे

दाग दामन लगाकर क्यूँ धोया नहीं
आसुँओं को बहाकर क्यूँ रोया नहीं
इन सितारों से पूछो जरा ऐ गगन ,
रात भर चाँद मेरा क्यूँ सोया नहीं

हाथ कंगन कहीं पर बजा रात में
रोशनी का नहीं है मजा रात में
तुमको देखा तो हमको लगा बस यही ,
चाँद जैसे किसी का सजा रात में...

ललित आगाज
औरैया उत्तर प्रदेश

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