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मेरे अल्फाज़

बाल दिवस पर लाल बिहारी लाल के कुछ दोहे

Lal Bihari

13 कविताएं

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दशरथ पिता नहीं रहे, कहां मिलेंगे राम
रिश्ते भी अब नेट पर, ढूंढ़ें मिले तमाम।।

पढ़ना लाल भूल गये, संस्कारों की बात
कौन उन्हें समझाये, आज भला यह बात।।

बाल साहित्यकार भी, हो गये आज सयान
लाल भी अब ठीक-ठीक, कैसे पाये ज्ञान।।

बाल साहित्य में छुपा, दुनिया भर का ज्ञान
ठीक-ठीक जो पढ़ लिया, उस घर का कल्याण।।

लाल-लाल अब ना रहा बन गया आज बाप
खोद रहा खुद की कबर, देखो अपने आप।।

लाल कहां अब जा रहा, देखो आज इंसान
आज इसे यही रोको, जन-जन दो अब ध्यान।।

- लाल बिहारी 
  सचिव –लाल कला मंच, नई दिल्ली
  फोन-7042663073

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