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मेरे अल्फाज़

वाह ! जिन्दगी..

जिददी पारूल

8 कविताएं

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हम जद्दोजहद करते रहे किस्मत के साथ
देखा तो जाना, कहीं और जा रहे हैं

जहाँ नहीं है शुकून
न जाने हम क्यों चले जा रहे हैं

किस चीज की है आस अब
क्या पाने को खुद को भुला रहे हैं

हर बार ठोकर लग रही हैं
उठ कर फिर जा रहे हैं

गिरकर उठना, उठकर गिरना
इसी में जिन्दगी बिता रहे हैं

चारो तरफ से खुद को डूबा दिया
क्या होगा अब यही सोचे जा रहे है

रास्ते में मिला जो भी सबको अपनाया
उनको जब मिले, अजनबी बता रहे हैं

हवाओं का रुख ज्यों ही मुड़ा
वक्त के पीछे जा रहे हैं

हम जद्दोजहद करते रहे किस्मत के साथ
देखा तो कहीं और जा रहे हैं।

- भारद्वाज पारुल
उत्तर प्रदेश

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