आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Hr pahlu ke do tallukat

मेरे अल्फाज़

उम्र भर का तकाजा

संजीव रामपाल

325 कविताएं

206 Views
चंद लम्हों की दस्तक,
उम्र भर का तकाजा।
दो रंगों से बना संसार,
हर पहलू के दो ताल्लुकात।
चरमराती दास्तान जमीं के वन्दे की,
हर तरफ रास्ता चलने बाले की जमीं।,

- बाबा

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!