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मेरे अल्फाज़

अहंकार

कमलेश कुमार

31 कविताएं

5 Views
बडा़ इतना हो कि तू आसमां को हाथ से छू ले ।
गुमां उस दिन मिलेगा धूल में जब खाक तू होगा।।

कमलेश कुमार पाठक "कमल"

सिंघा, बरेली

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