आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Yun hi ek din

मेरे अल्फाज़

यूं ही एक दिन

Kumar Rishi

105 कविताएं

13 Views
आंगन में एक बीज बो दिया मैनें
यूं ही एक दिन
बारिश भी आ गयी यूं हीं एक दिन
जमीन फाड़कर एक पौधा बाहर आ गया
यूं ही एक दिन
बढ़ते बढ़ते पौधा बन गया बड़ा पेड़
यूं हीं एक दिन
मैनें भी झूला डाल दिया उस पर
यूं हीं एक दिन
पूरा घर उसकी छांव में गुजारता
यूं ही एक दिन
गांव के लोगों ने देवता मान लिया उसे
यूं हीं एक दिन
ज़िन्दगी में बड़े बड़े काम हो जाते हैं
यूं ही एक दिन

~कुमार ऋषि

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!