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मेरे अल्फाज़

भीख मत माँग ऐ इंसान

Kumar Rishi

67 कविताएं

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भीख मत माँग ऐ इंसान
इन हुकमरानो से
माँगना है तो अपना हक माँग
इन हुकमरानो से
हाथ मत जोड़ इनके आगे तू
छाती ठोक के खड़ा हो तू
जमीन का टुकड़ा नहीं
पूरी जमीन माँग
इन हुकमरानो से
ये तेरे रहनुमा हैं
तूने इन को चुना है
तेरे कारण इनका वजूद है
जो भी माँग ज़रा खुल के माँग
इन हुकमरानो से...
तू नहीं बाशिंदा
ये तेरे बाशिंदे हैं
ग़र तू नहीं तो
ये कुछ भी नहीं हैं
बाहर क्यूँ खड़ा है
घर में घुसकर माँग
इन हुकमरानो से..
तेरे कपड़े फटे हुये
चप्पल तेरी घिसी हुई
चेहरा तेरा झुलसा हुआ
पीढ़ियों से है तू गुलाम
आज अपनी आजादी माँग
इन हुकमरानों से..
बिन ब्याही बेटी के लिये
बेरोजगार बेटे के लिये
बूढ़े माँ बाप के इलाज के लिये
ले लिये जिसने तेरे प्राण
अपने कर्जे की पाई पाई माँग
इन हुकमरानों से..
~कुमार ऋषि


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