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मेरे अल्फाज़

दहेज -पुरानी सोच

kuldeep kumar

5 कविताएं

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दहेज -पुरानी सोच

लोग सोच रखते बड़ी पुरानी
पहले मिले पैसा फिर मोटरगाड़ी
आगे तो फिर ऐसा चलता रहेगा
पहले हो जाए मेरे बेटे की शादी

लोग बना देते अपने बेटे को वकील
बहू लाऐ ऐसी जो हो नोटों की मशीन
जब बटन दबाया पैसे निकाल लिए
क्या जाता है अपना सोच कर छाप लिए

बेटियाँ भी होती हैं बड़ी समझदार
घर मैं हैं पैसे लाती हर बार
पैसे खत्म होते ही मर जाती हैं
ससुराल को मालामाल कर जाती हैं

ऐसा करने से बढ़ावा सासों को
नई नई बहुऐं लाने की सोचती बो
बस थोड़ा और कमाने के चक्कर में
बहुओं को जलाने के तरीके ढूढती वो

ऐसा चलता रहेगा कब तक
बहुऐं डरती रहेगीं जब तक
पहले सास को बहू की तरह समझाओ
न समझे तो खुद भी सास बन जाओ

Written by
kuldeep kumar(AUE)

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