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मेरे अल्फाज़

तुम पहले हो कि जिसने ये चिंगारी लगायी है...

kriti baghel

1 कविता

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तुम्हारी मुलाकात से पहले मेरी कविताओं का कोई आधार न था
बेहिसाब अल्फाजों के बीच इन किस्सों का कोई सार न था।
हाँ ये सच है कि तुम्हारे बगैर गुजरें हैं कई मौसम बेवजह,
और ये भी कि तुमसे पहले वो बेपरवाह इश्क किसी से हुआ भी न था।
अब कलम हाथ में पकड़कर, जो मैंने कविताओं की झड़ी लगायी है,
तो तुम ये जान लो, कि तुम पहले हो,
जिसने ये चिंगारी लगायी है।
अब दिल ये सवाल करता है कि तुम इतने बरस कहाँ थे,
इन बातों का हिसाब दो.. ?
मेरी कहानी अब तुम पर इसे गहराई से समझो और नया आयाम दो।
अब तुम्हारे साथ से गुलजार है जिन्दगीं मेरी,
और दिल का हर कोना रौशन सा लगता है।
रचनाएं चाहे कितनी भी कर ले ‘कृति’
हर अल्फाज आकर बस तुम पर अटकता है।
-कृति


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