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मेरे अल्फाज़

जीवन यात्रा

Krishna Murari

66 कविताएं

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जीवन की यात्रा में हमने
कई थपेड़े खाये हैं।
कभी खुशी तो कभी गमी के
इसमें मौसम आये हैं।
कोई मिला तो कोई बिछड़ा,
कोई अभी भी साथ खड़ा है।
जीवन के इस आंगन ने
धूपछाँव बहुत दिखाए हैं।
जीवन की यात्रा में हमने
कई थपेड़े खाये हैं।
कभी खुशी तो कभी गमी के
इसमें मौसम आये हैं।
कभी प्रेम तो कभी प्रशंसा,
कभी घृणा तो कभी गालियां,
कितने गीत सुनाए हैं।
कभी जीत तो कभी हार के
कितने पाठ पढाये हैं।
जीवन की यात्रा में हमने
कई थपेड़े खाये हैं।
कभी खुशी तो कभी गमी के
इसमें मौसम आये हैं।
बचपन की मदमस्त जिंदगी,
यौवन की अल्हड़ जिंदगानी,
कितने रूप दिखाए हैं।
बढ़ते कद के साथ ही
बढ़ती जिम्मेदारी,
नैतिक मूल्यों की सार्थकता,
कर्तव्यों के बंधन भी तो
इसने खूब बताए हैं।
पतछड़ के बाद आता बसन्त है,
इसने खूब सिखाए हैं।
जीवन की यात्रा में हमने
कई थपेड़े खाये हैं।
कभी खुशी तो कभी गमी के
इसमें मौसम आये हैं।

- कृष्ण मुरारी

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