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मेरे अल्फाज़

तुझे पाने के लिए सब कुछ खोना चाहती हूं मैं

Krishna Mohan

64 कविताएं

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मेरा जीवन तुम्हारे बिन अधूरा सा लगे मुझको,
हमेशा के लिए अब तेरी ही होना चाहती हूं मैं।

इजाजत हो तो तेरे दिल कर लूं नाम मैं अपने,
नहीं तो सिर्फ इक छोटा सा कोना चाहती हूं मैं।

तेरी यादों में घुट-घुट के जीना हो रहा मुश्किल,
तुझे पाने के लिए सब कुछ खोना चाहती हूं मैं।

चाहती हूं कि दर्द-ए-दिल तुझको सुनाऊं और,
तेरे कदमों पे सर रखकर के रोना चाहती हूं मैं।

यूं ही तन्हाइयों में नींद आती है कहां किसको,
तेरे आगोश में आकर अब सोना चाहती हूं मैं।

सावन आ रहा है तो तुम्हारे दिल की ज्वाला को,
कर के प्रेम की बारिश भिगोना चाहती हूं मैं।

कृष्ण मोहन उपाध्याय
मऊ, उत्तर प्रदेश।



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