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मेरे अल्फाज़

रातों को ये तन्हाई चुरा ले जाए ना हमको

Krishna Mohan

64 कविताएं

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ज़रा सा दूर होने पर ही डर जाता है दिल मेरा,
मेरे हमराह अब तुमको न खोना चाहता हूं मैं।

जिसे देखूं जहां देखूं नजर आए बस तू ही तू,
तुझे ही याद करके अब न रोना चाहता हूं मैं।

रातों को ये तन्हाई चुरा ले जाए ना हमको,
अकेले अब तुम्हारे बिन न सोना चाहता हूं मैं।

तन्हा कट रही है रात मेरी और तुम्हारी भी,
बोझ अब ये जुदाई का न ढोना चाहता हूं मैं।

हम-तुम एक हो जाएं दिली इच्छा हमारी है,
तेरे बगैर किसी के अब न होना चाहता हूं मैं।

चाहते हैं कि आ जाओ मेरे महबूब सावन में,
अब दिल की तमन्ना को न धोना चाहता हूं मैं।

कृष्ण मोहन उपाध्याय
मऊ, उत्तर प्रदेश।


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