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मेरे अल्फाज़

सर्द हवाएं

Anonymous User

91 कविताएं

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यूं ही कह दिया बेवफ़ा मुझको,
बात आखिर क्या है बता मुझको।

तू मेरे जीवन की अमावस न बन,
अब तो चाहिए पुर्णिमा मुझको।

तेरी जिंदगी से दूर चला जाऊंगा,
नहीं लेना झूठ का आसरा मुझको।

तुझे लगता है कि कसुरवार मैं हूं !
तो अपनी जिंदगी से हटा मुझको।

कहां खो गई है तेरे चेहरे की रंगत,
रोज कहता है आईना मुझको।

कुछ दिनों से ठंड बढ़ सी गई है,
सर्द लगती है अब हवा मुझको।

मान लो कि गलती तुम्हारी है और,
पास आकर गले से लगा मुझको।

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