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मेरे अल्फाज़

चुनाव आते हैं

k.j gadhvi

12 कविताएं

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जब जब देश में चुनाव आते हैं
हाथ जोड़कर नंगे पांव आते हैं
पानी की समस्या जस की तस
व्हिस्की ओर वडापांव आते हैं
राम की तरह वनवास से नेता
विदेश यात्रा छोडके गांव आते हैं
खून बहाने वाले आँसु बहायेंगे
लूभावना बहोत ही दाव आते हैं
मुर्छा आये लखन जैसी जनता को
संजीवनी लेकर भीमराव आते हैं

- के.जे.गढवी

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