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Atleast feel me..

मेरे अल्फाज़

मुझे महसूस तो कर

Kiran Mishra

60 कविताएं

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तेरे ही हर सांस सांस में
तेरे ही हर बात बात में
पलकों में गीलापन मैं हूं
मन का तेरे सीलापन मैं..
तेरे ख्वाबों की जोगन बन..
फिरूं मैं तेरी रात रात में
सुबह तुहिन कण
शाम क्षितिज वन
पावस बदली बन मैं पगली..
बरसूं तेरे मन आंगन ....
अधर तेरे रंग जाऊं
दुपहरी में अमलतास बन
महकूं तेरे...अंग अंग में
रजनीगन्धा... हर सिंगार सी....
मैं हूं तेरे नयन द्वार में...
मुकुलित पलकें..
खुली हैं अलकें...
आलिंगन मे..
शब्द जाल सी
तेरी कविता के गहन भाव में..
सोयी हूं मैं....
शान्त ....झील सी...
शब्द शब्द तेरे कर सिंगार मैं... ..
बन्दिनी तेरे हर्फ हर्फ में ....
तुझमें ही मैं रची हुई हूँ
तेरे लफ़्जों से संवरी हूं...

-किरण मिश्रा

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