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Ruthne Ko Dil Krta Hai

मेरे अल्फाज़

रूठने को दिल करता है

Khushi Saifi

3 कविताएं

25 Views
गुरुग्राम के रायन स्कूल में सात साल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या कर दी गयी। प्रद्युम्न के पिता की दिल की कश्मकश को बयां करती कुछ पंक्तियां...

आज एक पिता के
दिल की बात कहने को दिल करता है
मां की सुनी है
अब पिता की सुनाने को दिल करता है
या रोया है वो बाप
कितना कहने को दिल करता है
आज बच्चों की तरह
रूठने को दिल करता है।।

सारी दुनिया को
झनझोड़ने को दिल करता है
आज सारा जहां
छोड़ने को दिल करता है
या बहते पानी को
रोकने का दिल करता है
आज बच्चों की तरह
रूठने को दिल करता है।।

सारी जंजीरों को
तोड़ने को दिल करता है
आज भगवान से भी
रूठ जाने को दिल करता है
या हुआ उसके साथ ही क्यों
पूछने को दिल करता है
आज बच्चों की तरह
रूठने को दिल करता है।।

आखरी वक्त में
वो मासूम तड़पा होगा कितना,
खून की बहती धारा
गवाह है उसके दर्द की
आज उस वक्त को
मिटाने को दिल करता है
या दहाड़े मार मार के
रोने को दिल करता है
आज बच्चों की तरह
रूठने को दिल करता है।।

आज सुनी है मां की
गोद बताने को दिल करता है
खाली है बाप का
दामन दिखाने को दिल करता है
डरी सहमी है बहन
सीने से लगने को दिल करता है
आज बच्चों की तरह
रूठने को दिल करता है।।

उठा लूं खंजर कि
उसे भी तड़पाने को दिल करता है
आज उसके भी बच्चे
का गला चाक करने को दिल करता है
या उस जालिम को
खुद सज़ा देने को दिल करता है
आज बच्चों की तरह
रूठने को दिल करता है।।

पिता का दर्द उस
हत्यारे को भी बताने को दिल करता है
आज उसके भी मासूम की
मौत की खबर देने को दिल करता है
फिर क्या बीतती है उस पर
पूछने को दिल करता है
आज बच्चों की तरह
रूठने को दिल करता है।।

आज मौत के बाद "प्रद्युम्न" ने
फिर मां बाप को पुकारा है
"मुझे इंसाफ दिलाओ"
गुहार के साथ पूछा है
क्या ऐसे हत्यारे कभी
दुनिया से मिट पाएंगे "खुशी"
जवाब "ना" में पा कर
आज फिर बच्चों की तरह
रूठने को दिल करता है।।


-खुशी सैफी
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