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मेरे अल्फाज़

काश, कभी ऐसा हो सकता

Khushboo Pandey

2 कविताएं

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काश!
काश, वे लम्हे वापस आ सकते,
जिनमें हम वापस गुम हो सकते।
होती कोई जादुई किताब,
देती हमको नया ख़िताब।
जहाँ नहीं थी कोई चिंता,
पढ़ने की थी केवल ममता।
एकल अपना ही राज़ था,
न किसी अन्य का साज़ था।
केवल कैंटीन का खाना,
घूमना और घुमाना।
अध्यापक के गुण गाना,
और दोस्तों के संग गुनगुनाना।
गम के निशां झूठे थे,
ख़ुशी के पल सच्चे थे।
उस वक्त हम बच्चे न सही,
पर मन के सच्चे थे।
काश वे लम्हे वापस आ सकते,
जिनमें हम वापस गुम हो सकते।

खुशबू

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