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मेरे अल्फाज़

सनम

Khare Jayantee

11 कविताएं

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खामोश मग़र आवाज़ सनम
इस सन्नाटे में शोर सनम

मज़बूर हुए हम इस दिल से
दो दिन फिर क्यूँ दूर सनम

ग़र हमसे है प्यार तुम्हें भी
फिर फ़ासले क्यूँ मंजूर सनम

हर मौसम में जो साथ रहे
ऐसा होता प्यार सनम

रूह से छूकर जो गुजरे
रग-रग में रवानी सनम

भूल गए हो क्या हमको
कोई ख़बर न याद सनम

खामोश मग़र आवाज़ सनम
इस सन्नाटे में शोर सनम

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