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मेरे अल्फाज़

मैंं कह नहींं सकती

Kavita Tyagi

36 कविताएं

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मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है

घर में चीजें खाने पीने की
खुशियां छोटी-छोटी जीने की
हम भाई बहन को देती है माँ
वह दोनों ही की माँ हो कर भी
भेदभाव नहीं करती है
मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है
मैं कह नहीं सकती

हम रोए तो वह रोती है
हम हँस दे तो खुश होती है
मुझ पर सख्त निगाह रखती है
मेरी विपद में मेरी ढाल बन ,
मेरे लिए नहीं मरती है
मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है
मैं कह नहीं सकती

वह घंटो तक प्रवचन सहेजती
तब कॉलेज में मुझे भेजती
मैं वयस्क हूँ , मैं सक्षम हूँ
बार-बार कहहने पर भी
माँ को यह बात कभी भरती है
मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है
मैं कह नहीं सकती

मुझ पर गर उंगली उठ जाएगी
माँ जग-भर से भिड. जाएगी
मुझ पर उसका विश्वास अटल है
पर स्वतंत्र विचारों वाली माँ ,
जग-अपवादों से नहीं डरती है
मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है

जो बेटी सम्यक शिक्षित है
बुद्धि बल से वह रक्षित है
भ्रष्ट तत्वों-व्यवस्था से लड़
लक्ष्य की ओर प्रतिक्षण बढ़ती है
ज्ञान-प्रेम-सत्कर्म के बल पर
हर कदम पे वह विजयश्री वरती है
माँ मुझे बहुत प्यार करती है
माँ मुझे बहुत प्यार करती है 


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