आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Gazal

मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल

Kavi Yogendra

1 कविता

6 Views
नाव बनकर समन्दर में डूब रहा हूं मैं
अब तुम्हारी भी आँखों मे चूभ रहा हूं मैं

तू मुझे भुला दे इसका कोई ग़म नही
दिल को सूकूं है,तेरा मेहबूब रहा हूं मैं

कहते हैं लोग मै पागल हो गया,तेरे इश्क़ में
मगर तेरी ख़ामोशी से ऊब रहा हूं मैं

मेरी शायरी इत्तेफाक है या कोई फ़साना
सुख़नवरों को फिर भी कबूल रहा हूं मैं

रखता हूँ हुनर पत्थर को ज़िन्दा करने का
दुनिया कहती है आदमी भी खूब रहा हूं मैं

- चिराग़ सलेमपुरी
मो0 8957825461

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Your Story has been saved!