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मेरे अल्फाज़

चलो ! किसी का भला करें हम

Kavi Satya

16 कविताएं

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चलो ! किसी का भला करें हम,
दर्द जख्म के सह जायें 
एक अमीरी एक फकीरी,
बोलो किसके घर जायें ।।

अपनी खुशी में सब हंसते हैं,
अपने गम में रोते हैं
दीवाना गुल इतना बोले,
हंसते हंसते रोते हैं ।।

आओ हाथ थाम लो मेरा,
पल पल आगे बढ़ जायें
चलो किसी का भला करें हम,
दर्द जख्म के सह जायें ।।

दीपों की झिलमिल लड़कियों सी,
मेहंदी जैसी रस्में हैं
न तू मेरे बस में साथी,
न हम तेरे बस में हैं।।

वो क्या प्यार निभाएंगे जो,
आंख में आंसू दे जायें 
चलो किसी का भला करें हम,
दर्द जख्म के सह जायें ।।

हम तो डूबे इतना इतना डूबे,
अब पानी पर चलते हैं 
थाली में दो दीप नयन से,
याद में तेरी जलते हैं ।।

हम टूटे चंदा के तारे,
खुशियों से दामन भर जायें ।।

मुद्दत हुई पर उसका कुछ पता भी नहीं 
चलो किसी का भला करें हम,
दर्द जख्म के सह जाएं ।।

- सत्यदेव सिंह आजाद
  इटावा, उत्तर प्रदेश, 9760117355

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