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मेरे अल्फाज़

उस दिन

Kavi Hari

30 कविताएं

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उस दिन
जिस दिन टूटा था
तेरा चिर स्वर्णिम स्वप्न
मैंने महसूस किया था
तेरे अंतर में था दर्द असीम
उस दर्द में तेरे मन की निराशा झलक रही थी
मगर आँसू की एक बूंद न टपक रही थी
अटके हुए थे आँसू
तेरे पलकों के मुहाने पर
और तुम,
नजरें चुरा रही थी
अपना दर्द छुपाने के लिए।

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