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मेरे अल्फाज़

ओ री निंदिया

Kavi Hari

12 कविताएं

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ओ री निंदिया ! तू आजा री
तेरे लिए तरसे नैना।
न लोरी है, न थपकी है
तू आएगी कहो कि ना ?
ओ री निंदिया ! तू आजा री
तेरे लिए तरसे नैना।

मैं व्याकुल हूँ, तू मस्ती में
छुपी हो कौन सी बस्ती में
कटे कैसे निर्जन रैना ?
तू आएगी कहो कि ना ?

न गोरी की नरम बाहें
न मस्ती की गरम आहें
आना है, है कि ना ?
तू आएगी कहो कि ना ?

भाव से तू मीठी है
भला मुझसे, क्यों रूठी है ?
कहोगी तो मिले चैना
तू आएगी कहो कि ना ?

हो गया भोर का दीद सखी
छोड़ भी दे अब जिद सखी
कसर तेरी सहूँ मैं ना
तू आएगी कहो कि ना ?

आँखों को सता करके
न रख दे तू फ़ना करके
अदावत से भी तू पैना
आना है तो आ जाना
तू रख समय का पैमाना।

ओ री निंदिया ! तू आजा री
तेरे लिए तरसे नैना।

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