आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Aadhi rat ko nind khuli to

मेरे अल्फाज़

आधी रात को नींद खुली तो

Kavi Hari

31 कविताएं

114 Views
आधी रात को नींद खुली तो
देखा आँखें मीचे
चाँद अकेला ताक रहा था
आसमान से नीचे
वो तो ऊपर तारों संग था
मैं नीचे तन्हा था
और तुम्हारी याद आ गई
फिर मैं, मैं कहाँ था
करवट बदला जैसे-तैसे
नींद कहाँ फिर आई
मेरे ख्यालों के अम्बर में
बादल बन तू घिर आई
बादल को बरसना ही था
मेरे आँसू बनकर
आँसूओं से प्रेम तुम्हारा
प्रकट हुआ छन-छन कर।

-कवि हरि शंकर, पटना।


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!