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मेरे अल्फाज़

हम तेरे बिना भी रह लेंगे

Kasim Raza

5 कविताएं

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तोहफे में दिया है दर्द अगर तेरा दर्द भी हम तो सह लेंगे
तू मुझसे बिछड़ कर खुश है अगर हम तेरे बिना भी रह लेंगे

जलता है अगर तो जलने दे उल्फत का चराग अभी दिल में
फुरकत में तेरी वरना ऐं सनम आंखों से ये अश्क भी बह लेंगे

मेरे दिल की दुनिया लूटने वाले तु गम ना कभी करना मेरा
सीने में छुपा कर दर्द तेरा तन्हाई में अपनी जगह लेंगे

हो जाओगे तुम जब मुझसे जुदा रह जायेगें हैरां देख के सब
जब नाम तेरा बस्ती में तेरी हम दीवानों की तरह लेंगे

मुझे तन्हा छोड़ के जाने वाले शिकवा न करेंगे हम तुझसे
जो कुछ भी हमें कहना होगा खुद अपने ही आप से कह लेंगे

जीने को तो हम भी जी लेंगे पर तेरी कमी महसूस रहेगी
हम दर्द के मारे अब क़ासिम ना दर्द कभी बे वजह लेंगे


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