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मेरे अल्फाज़

आशिकाना

kartik srivastava

81 कविताएं

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आशिकाना

नज़र से दिवाने बताने लगे
इशारों इशारों में इश्क फरमाने लगे ।।

तेरी दिल्लगी का सनम आ गया
राह चलते चलाते दीवाने लगे ।।

मुस्करा कर सनम इशारा करें
फिर मिलन के बहाने लुभाने लगे ।।

नज़र को नज़रात कराते हुए
सितमगर अब जलवे दिखाने लगे।।

नज़र से लबों पर लगे बाँसुरी
लबों पर अधिकार लगाने लगे ।।

मयकशी लगन से लबालब चली
आशिकाना भी मुझको याद आने लगे ।।

चलो छू चलें दोस्ती की डगर
आजमाइश कर इरादा जताने लगे।।

- अनुपम कुमार श्रीवास्तव 
  कानपुर

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