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मेरे अल्फाज़

बादलों को देख दिल यूं मुस्कुराता है!

Kanak Pandey

5 कविताएं

21 Views
इन बादलों को रोते हुए देख रहे हैं दिल यूं मुस्कुराता है।
इन बादलों की रोना किसी को नज़र आता है
कभी दबी आवाज सा गुर्राता है, कभी बिजली सी चमक गुस्सा दिखाता है, और फिर बरस जाता है,

हमारे इंसानियत की तो मिसाल है साहब! वह इंसान बादल का क्रन्दन देख खुशियां मनाता है,
इन बादलों को रोते हुए देख,दिल यूं मुस्कुराता है!
पर इनका क्रन्दन नजर नहीं आता है।

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