आपका शहर Close
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Jub jub tiranga mere watan ka lehrata hai.

मेरे अल्फाज़

जब- जब तिरंगा मेरे वतन का लहराता है !

Kamni Gupta

24 कविताएं

158 Views
जब जब तिरंगा मेरे वतन का लहराता है।
अजब सा सुकून मेरे मन को तब आता है।
जब कोई शहीद इस मिट्टी में मिल जाता है;
भारत माँ का सीना छलनी सा हो जाता है।
आतंक के कठिन दौर में जागो न अब चुप रहो;
अपने वतन को अपना समझो कहती भारत माता है।
मतभेद गर यूंही बड़ते रहे आपस में तो ;
नहीं दिखेगा तिरंगा जो लालकिले पे लहराता है।
जागो खुद भी जन जन में चेतना जगाओ तुम;
समय रहते देश की सोचो बच्चा बच्चा दोहराता है।
क्योंकि ये आजादी नहीं वीरों के शौर्य की गाथा है।
कामनी गुप्ता ***
जम्मू !

#AzadAlfaz

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!