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मेरे अल्फाज़

वो लता

Kamlesh Sharma

6 कविताएं

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न जाने किसकी थी वो लता।
मुझे नहीं पता।
पतझड आ चुकी तुलसी पर चढकर खिलखिलाई वो लता।
न जाने किसकी थी वो लता।
मुझे नहीं पता।
नई उमंग थी थी नई तरंग
था अहसास नया।
फिर क्यों इक रोज
मुरझाई पडी थी वो लता।
मुझे नहीं पता।

सरिता शर्मा
कमलेशकुमार (मेरे पापा)
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