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मेरे अल्फाज़

इश्क़

Anonymous User

10 कविताएं

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इश्क़ की ग़ज़ल से लेकर,
शब्दों के वस्ल तक।

नज़र के मिलने से लेकर,
बिछड़ने के वक़्त तक।

दिल के धड़कने से लेकर,
साँसों में बसने तक।

सूरज के निकलने से लेकर,
शाम के ढलने तक।

जिस्म के जलने से,
रूह के निकलने तक।

गुज़रे कल में, आने वाले पल में,
मेरे दिल की हर धड़कन में।
तुम हो , तुम ही हो, सिर्फ़ तुम।।

- कल्पना 'खूबसूरत ख़याल'

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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