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मेरे अल्फाज़

मैं तो तेरी मीरा बनना चाहती हूं

Kajal Nayak

3 कविताएं

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नहीं बनना मुझे तेरे घर का गुलाब का पौधा
मैं तो तेरे घर की तुलसी बनना चाहती हूं
मत देना तुम प्रेम मुझे राधा की तरह
तुझे आराध्य बनाकर मैं तो तेरी मीरा बनना चाहती हूं

नहीं है प्यास मुझे तेरे प्रेम की
मैं तो तेरे विरह से तेरे प्रेम का स्पर्श करना चाहती हूं
इतना आसान कहां है तेरा हो जाना
मैं तो सदा तेरे प्रेम की तपस्या करना चाहती हूं
नहीं बनना....

ना बनना है मुझे रुकमणी तेरी
मैं तो तेरे प्रेम मैं तेरी जोगन बनना चाहती हूं
अभागन का नाम तुम ना देना मुझे
मैं तो जीवन भर बस तेरा नाम रटना चाहती हूं
नहीं बनना.....

इस मोहब्बत के बंटबारे की सहभागी नहीं बनना मुझे
मैं तो तेरी यादों को अपने हिस्से लिखना चाहती हूं
मोहब्बत ज़िद होती तो तुम कब के मेरे हो जाते
जो आसानी से ना मिल पाए वो प्रेम करना चाहती हूं
नहीं बनना.....

बनकर तेरे लबों की खुशियां
सदा तेरे खुश रहने की दुआ करना चाहती हूं
मुझे जोगन ही रहने दो प्रियबर
मैं तो अपनी जिंदगी को तुझ पर कुर्बान करना चाहती हूं
नहीं बनना.....


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