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मेरे अल्फाज़

इस वर्ष ये कैसा सावन आया

Kajal Maurya

1 कविता

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इस वर्ष ये कैसा सावन आया

हर जगह है बस भय का साया
इस वर्ष ये कैसा सावन आया

उदासी है छायी हवाओं में
कुछ दर्द भरा है इन घटाओं में
पावस की बूंदें भी देखो
वसुधा से हो ये कहती
तेरी विपदाओं को देख
मैं भी कितना रोती

तेरे हर कण में क्यों इतना क्षोभ भर आया
इस वर्ष ये कैसा सावन आया

न रमजान का कोई मेला है
न कांवरियों का कोई डेरा है
है तो बस इक चुप्पी
और संशय ने घेरा है

वक्त ने भी देखो इस वक्त को है कैसे ठहराया
इस वर्ष ये कैसा सावन आया

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