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kagaj kya ye jahan tinka bhr hai he ma tere kadmon men dhrti ambr hai

मेरे अल्फाज़

कागज़ क्या ये जहाँ तिनका भर है

गिरीश आजाद

87 कविताएं

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कागज क्या ये जहां
तिनका भर हैं
हे माँ तेरे कदमों में
धरती अम्बर है

तू विधाता मेरी
मैं पुजारी तेरा
तू दाता ममतामयी
मैं भिखारी तेरा

कठिन शब्दों में
सरल 'काव्य' कहूँ
तू जननी मेरी माँ
मेरा धरती अम्बर है

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