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मेरे अल्फाज़

अमीरी बनाम गरीबी

Jyoti Pandey

12 कविताएं

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आमीरी का आलम कुछ
इस तरह आमीरों पर छाया,
इंसानियत के नाम पर वो
करते हैं गरीबों से छलावा,
कैसी विडम्बना दिखलाई
देती इस वसुन्धरा पर,
मासूम बच्चा भी तरसता
रहा यहाँ पाने को माया(रोटी)।
भुखमरी से दम तोड़ती
ज़िन्दगियों का नहीं हैं कोई सहारा,
न जाने कितने बार गरीबों को
रौंदने के बाद करेंगे ये ड्रामा,
होश नहीं स्वयं के पास ,
बेहोश समझते हैं गरीबों को,
सड़क किनारे बसेरा हैं जो उनका
वहाँ भी पहुँचकर अमीरो ने
उनके जीवन में कर दिया अंधेरा।


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