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मेरे अल्फाज़

इतने नादां नहीं है कि हम एक दिया...

Jitendra Bhardwaj

1 कविता

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इतने नादां नहीं है कि हम एक दिया
हो अंधेरा कहीं और जलाये कहीं
तुमको पाने का निर्णय जब कर लिया
एक कर दूंगा आकाश और ये जमीं

प्रेम की बाँसुरी के मधुर स्वर को तुम
सुन न पायीं तो इसमें मेरी क्या ख़ता
मैं तो जलता रहा जुगनुओं की तरह
कब अंधेरा छटेगा मुझे क्या पता

प्यार की राह में धूप में छाँव में
तुमसे मिलना है मुझको है पूरा यकीं
तुमको पाने का निर्णय जब कर लिया
एक- एक कर दूंगा आकाश और ये जमीं...

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