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मेरे अल्फाज़

सच है

Jha Avanish

15 कविताएं

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तेरा साथ भी एक दिन छूट जाएगा
न रूठने का बहाना होगा,
न समय मनाने का,
सारे रिश्ते-नाते छूट जाएंगे,
क्या गरीबी और अमीरी,
कुछ समझ नहीं आएगा,
जब जिंदगी का आखिरी मुकाम आ जाएगा।

न कोई दुश्मन, न कोई दोस्त होगा
न कोई सपना, न जिंदगी का भाग-दौड़ होगा
ये बंगला-महल बस कुछ दिनों के मेहमान हैं
बस जुबां पे राम नाम ही आएगा
जब जिंदगी का आखिरी मुकाम आ जाएगा।

पाप और पुण्य का हिसाब भी वहीं होगा,
न मखमली कपड़े, न हाथी-घोड़ा,
न मोटर गाड़ी,न रजाई-गद्दे
बस चंद हाथ के कफ़न में लिपटकर,
ये शरीर हमारा मिट्टी में मिल जाएगा
जब जिंदगी का आखिरी मुकाम आ जाएगा।

लेखक-अवनीश चंद्र झा

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