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मेरे अल्फाज़

विरह गीत

jeetesh mishra

1 कविता

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सोचा पूँछू हाल तुम्हारा,सोच रही हूँ किस हक से ??
पूँछू खुश हो बिन मेरे क्या!!
सोच रही हूँ किस हक से??

(१) याद नहीं क्या वो लम्हे जो
साथ मेरे थे जिये हुए
वो कसमें और वो वादे थे
जो इक दूजे से किये हुए
सोचा तुमको याद दिलाऊँ..पर
सोच रही हूँ किस हक से ??
पूँछू खुश हो.....

(२) तेरे बदले मिले खुदा वो
नहीं चाहिए फिर मुझको
सोच लिया है भुला दिया क्या
मेरे इस दिुल ने तुझको
पिया जो विष वो तुम्हे बताऊँ..फिर
सोच रही हूँ किस हक से ??
पूँछू खुश हो......

सोचा पूँछू हाल .....

(३) रस्ता देख रही पथराई
अखियाँ आने का तेरे
रहा नहीं एहसास क्या तुमको
तडपन का प्रियतम मेरे
तुम्हें सुनाऊँ हाल मैं अपना..पर....

सोच रही हूँ किस हक से..??

पूँछू खुश...

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